PDA

View Full Version : নিম্নোক্ত লোকদের কি তাকফীর করা যাবে??



fg2464885
03-30-2018, 07:07 AM
আস-সালামু-'আলাইকুম,

সংসদ সদস্য, মেয়র, চেয়ারম্যান, মেম্বার ইত্যাদি লোকদের কি কাফের/মুরতাদ আখ্যায়িত করা যাবে??? আর যদি কাফের/মুরতাদ করা যায়, তাহলে সেটা কি সমষ্টিগতভাবে নাকি ব্যক্তিবিশেষে তাকফীর করবো???

reference pls.........

জাযাকাল্লাহ খায়ের।

ইলম ও জিহাদ
04-01-2018, 08:10 AM
আইন প্রণয়নের ক্ষমতা যাদের হাতে, তাদেরকে তাকফির করা হবে। বাকিদেরকে নয়। চেয়ারম্যান-মেম্বারের হাতে আইন প্রণয়নের ক্ষমতা নেই। সাধারণত মেয়রও এমনই। তাই ভিন্ন কোন কুফর না পাওয়া গেলে তাদের তাকফির করা হবে না।

আইন প্রণয়নের ক্ষমতা মূলত সংসদ সদস্যদের হাতে। তাই তারা কুফরে আকবারে লিপ্ত। এদের প্রতিটি সদস্যই কাফের। তবে ইসলামের নামে যারা গণতন্ত্র করে (যেমন- চরমোনাই) তারা যদিও কুফরে আকবারে লিপ্ত, কিন্তু তাদের তাবিলের কারণে আমারা তাদের তাকফির করবো না।

তবে মনে রাখতে হবে- তাদের তাকফির না করার অর্থ এই নয় যে, তাদের কাজটা কুফর নয়। তাদের কাজ অবশ্যই কুফরে আকবার। কিন্তু তাবিল নামের একটা মানেয়ে তাকফির পাওয়া যাওয়ার কারণে তাদের উপর মুরতাদের হুকুম লাগানো যাচ্ছে না। অর্থাৎ তাদের কাজটা কুফর (কুফরে মুতলাক্ব), কিন্তু তাদের সকল সদস্যকে কাফের বলা ( তথা তাকফিরে মুয়াইয়ান করা) যাচ্ছে না।

এ ব্যাপারে মিম্বারুত তাওহিদের নিম্নোক্ত দুটি সুওয়াল-জওয়াব দেখতে পারেন (সম্ভব হলে কোন ভাই অনুবাদ করে দিতে পারেন):

ما حكم نواب المجلس التشريعي الحمساوي وأفراد الحكومة ؟


رقم السؤال: 953 القسم : العقيده
تاريخ النشر: 16 /12/2009 المجيب: اللجنة الشرعية في المنبر


السؤال :
السلام عليكم ورحمة الله وبركاته..شيخنا الفاضل:
هل نواب المجلس التشريعي الحمساوي والوزراء مرتدون كفار بأعيانهم؟؟ المبدلين لشرع الله ؟ المتلبسين والواقعين في الشرك الأكبر , كما قرأنا لأئمة الدعوة النجدية أنهم لا يعذرون بالجهل في الشرك الأكبر فهل يكونوا كفار أم لا؟؟
هل أفراد الحكومة مرتدون أم أنهم يعذرون بجهلهم؟؟ بارك الله فيكم.
السائل: سلفي جهادي
* * *
الجواب:
وعليكم السلام ورحمة الله وبركاته..
الحمد لله والصلاة والسلام على رسول الله وعلى آله وصحبه وبعد..
بداية: لا فرق بين نواب حماس أو نواب فتح أو النواب المستقلين أو نواب أدعياء السلفية أو غيرهم في هذا الباب، مادامت حقيقة النيابة واحدة، وهي: التشريع وفقا لدين الديمقراطية، والتحاكم إلى القوانين الوضعية، والقسم على احترامها، والولاء لها قبل الشروع في الوظيفة التشريعية؛ فالعضو نتيجة لهذا القسم يحترم جميع التشريعات الكفرية التي ستشرعها وتقرها الأكثرية، حتى ولو لم يشارك في تشريعها، أو يوافق عليها؛ لأنه أقسم على ذلك، وهذه حقيقة دين الديمقراطية (حاكمية الجماهير).
فهذا الأمر يجب أن يكون واضحًا عند الجميع؛ فمن ارتكب الكفر أو الشرك يكفر سواء أكان من حزب إسلامي أو حزب عَلماني أو حزب إلحادي.
ثانيًا: نواب ووزراء حكومة حماس أو غيرها من الحكومات التي تشرع التشريعات الكفرية، وتحكم بغير ما أنزل الله مرتدون بأعيانهم؛ لأنهم ارتكبوا الشرك الأكبر بممارستهم خاصية التشريع التي هي لله وحده، لهذا فهم لا يُعذرون إلا بالإكراه، وهو غير متحقق؛ لأنهم دخلوا المجالس الشركية باختيارهم.
ثالثًا: جيوش الحكومات الطاغوتية - بما فيهم حكومة حماس - وشرطتها وجميع أجهزتها الأمنية هم مرتدون بأعيانهم؛ لأنهم هم الذين ينصرون الطواغيت، ويتولونهم، ويثبِّتون أركان حكمهم بغير ما أنزل الله ، وينفذون القوانين الوضعية والدساتير الكفرية، وينصرونها، ويرتكبون غير ذلك من الكفريات الظاهرة، فحكم جند الطاغوت هو حكم الطاغوت نفسه؛ قال تعالى: {إِنَّ فِرْعَوْنَ وَهَامَانَ وَجُنُودَهُمَا كَانُوا خَاطِئِينَ} [القصص: 8]، وقال تعالى: {وَقَالُوا رَبَّنَا إِنَّا أَطَعْنَا سَادَتَنَا وَكُبَرَاءَنَا فَأَضَلُّونَا السَّبِيلَا} [الأحزاب: 67]، وقال تعالى: {الَّذِينَ آمَنُوا يُقَاتِلُونَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَالَّذِينَ كَفَرُوا يُقَاتِلُونَ فِي سَبِيلِ الطَّاغُوتِ} [النساء: 76]، ولا يخرج من هذا الحكم إلا من علمنا في حقه مانعا شرعيًّا معتبرًا لا مُتوهمًا.
رابعًا: باقي أفراد الحكومة: كموظفي التعليم والصحة والخدمات الاجتماعية والأوقاف وغيرها لا يكفرون إلا إذا ارتكبوا كفرًا صراحًا بواحًا..هذا؛ وبالله تعالى التوفيق.

إجابة عضو اللجنة الشرعية :
الشيخ أبو الوليد المقدسي



----------------------------------

هل نعتبر كل نواب البرلمانات كفار ؟
رقم السؤال: 71 القسم : العقيده
تاريخ النشر: 28/9/2009 المجيب: اللجنة الشرعية في المنبر

نص السؤال:
السلام عليكم ...
هل نعتبر كل نواب البرلمانات كفار لأنهم مشرعين من دون الله بما في ذلك نواب حماس أو الإخوان المسلمين عموماً ممن لديهم تأويل .أرجو من الشيخ إفادتنا و جزاه الله خيراً.
السائل: الليث الليبي
***
الجواب:
أخي السائل بارك الله فيك..
لا بد أن نقرر أولا أمرا متفقا عليه- بين علماء التوحيد والجهاد على الأقل ومن وافقهم من غيرهم- لا يصح الخلاف فيه وهو أن الانتخابات البرلمانية التشريعية التي يكون فيها النائب مشرعا من دون الله هو شرك وكفر بالله وأن من وقع في شيء من ذلك فقد وقع في الكفر والعياذ بالله ...
هذا بالنسبة لكفر الفعل أو التكفير المطلق أما تكفير المعين على الإطلاق فهو مما اختلفت فيه الأنظار والاختلاف في ذلك يرجع إلى الاختلاف في فهم قاعدة العذر بالجهل والتأويل ومدى تطبيقهاوتحقيق المناط في المعين من وجود الوصف المكفر وتوافر الشروطوانتفاء الموانع ...وهذا الاختلاف في تكفير المعين هو فيمن كان كحال الذين ذكرتهم من اعتمادهم على التأويل فهو وإن كان تأويلا فاسدا باتفاق إلا أن الخلاف في اعتبار هذا التأويل مانعا من موانع التكفير من عدمه... وإن كان الخلاف في تكفير المعين مما لا يضلل لأجله الإنسان فالذي قد يكفره عالم أو طالب علم لأنه توافرت عنده في حقه شروط التكفير وانتفت موانعه قد لا يكفره آخر لأنه يعتقد بوجود مانع من موانع التكفير في حقه ...
وأنصحك أخي السائل بالرجوع إلى أول فصول كتاب "الرسالة الثلاثينية في التحذير من الغلو في التكفير" للشيخ أبي محمد المقدسي حفظه اللهوالتي تكلم فيها عن موانع التكفير وإلى جوابه عن فتوى حول حكم الشيخين عباس مدني وعلي بلحاج عندما نزلا إلى الانتخابات النيابية في الجزائر فهي مهمة في هذا الباب، وكذلك إلى رسالة الشيخ أبي قتادة فك الله أسره الموسومة بعنوان" أهل القبلة والمتأولون " فهي مهمة أيضا ...والله الموفق .